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You searched for: creator:"प्रफुल्ल कोलख्यान"
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[texts]अपने मोर्चे पर मरने की जिद्द - प्रफुल्ल कोलख्यान
.... घर के बदले पहुँच गया अजायब घर। डेढ़ दो घंटे तक घूम-फिर कर देखने के बाद मन कुछ हल्का था। और था यह एहसास कि किन-किन मुश्किलों का सामना करते हुए, उन पर अपने ढंग की विजय हासिल करते हुए मनुष्य आज तक क...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान
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[texts]अंतिम क्षण में जनतंत्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
बिना किसी आदर्श के, बिना किसी नायक के किसी सामाजिकता की गत्यात्मकाता में आत्मीयता का कोई प्रसंग नहीं जुड़ता है। इसका एक कारण यह है कि आदर्श और नायक से ही लोगों के मनोजगत का तादात्मीयकरण संभव ह...
Keywords: कोलख्यान; जनतंत्र; आलोचना; प्रेमचंद; रघुवीर; kolkhyan; hindi
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[texts]अस्मिता क्या और क्यों - प्रफुल्ल कोलख्यान
नव-सामाजिक आंदोलनों की खासियत यह है कि ये अस्मिता के सवाल को तो उठाते हैं, लेकिन उसके वर्गीय आधार को नकारते  हैं। बल्कि ये अपने को सामाजिक दायरे के नाम पर आर्थिक और राजनीतिक प्रसंग को अपने लिए ...
Keywords: कोलख्यान; अस्मिता; हिंदी; kolkhyan; alochana
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[texts]कैसे कहूँ, कह नहीं सकता, क्यों गंधमादन रोज दस्तक देता है - प्रफुल्ल कोलख्यान
किसके होने से कच्चे सपनों की मादक महक मुझे दीवाना बना देती हैकिसकी तलाश में मेरे आकाश का चाँद बादलों में सारी रात भटकता हैकिसकी पुकार पर खुशगवार चाँदनी मेरी आँखों में नंगे पाँव टहलती हैकौन ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]जीने के लिए चाहिए सारे-के-सारे औजार - प्रफुल्ल कोलख्यान
कविता को चाहिए उदास जीवन के अंत:करण में बची हुई करुणा का अंतिम राग। कविता को चाहिए ग्लेशियर की आत्मा में सोई हुई आग की अंतिम लौ। कविता को चाहिए प्रथम और प्रथमा के अद्वैत प्रगाढ़ आलिंगन की पहली ...
Keywords: कोलख्यान; कविता; आलोचना; अनिमेष; हिंदी; kolkhyan; hindi
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[texts]आलोचना की संस्कृति - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन-विवेक न उभय-निष्क्रियता की बात करता है और न निष्पक्षता का। ऐसा इसलिए कि विषम समाज अपनी निर्मिति में ही पक्षपातपूर्ण होता है। पक्षपातपूर्ण वातावरण में, निष्पक्षता चालू पक्षपातपूर्ण व्य...
Keywords: कोलख्यान; आलोचना; संस्कृति; kolkhyan; alochana; hindi
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[texts]दुःस्साध्य भाषिक कारीगरीः क़िस्सा कोताह - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन में बदलाव की बयार बह रही है। साहित्य में इस बयार से एक नए तरह का वातावरण बन रहा है। विधाओं की परंपरागत सीमाएँ टूट रही हैं। इधर विधाओं के संदर्भ में यह सामान्य साहित्यिक प्रवृत्ति चलन में ...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; राजेश; किस्सा; आलोचना
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता
Keywords: कोलख्यान,कविता,kolkhyan
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[texts]पुराने अंतर्विरोधों की नई जटिलताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
‘विकास’ के आशय में ‘नैतिक-मूल्यों’ का नहीं, ‘क्षमताओं’ का तात्पर्य शामिल होता है। क्षमता का ही दूसरा नाम स्वतंत्रता है। नैतिकता और क्षमता में सहमेल होना चाहिए, लेकिन इनमें पुराना अंतर्विरो...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; हिंदी; विचार; आलोचना
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[texts]गुजरात का अंतर्पाठ जनसत्ता - प्रफुल्ल कोलख्यान
गुजरात का अंतरपाठ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; जनसत्ता.kolkhyan; gujrat; hindi; jansatta
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[texts]मन उढ़रल जाइ - प्रफुल्ल कोलख्यान
कहियो सोन त बूझै आखारलागए जेना, झूठक अवतारई है सरकार, हो उहे सरकारवोटवा के बतहा करए ब्यौपार
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]गर्म हवा में लहराते परचम - प्रफुल्ल कोलख्यान
गर्म हवा में लहराते परचमहवा बहुत गर्म है खेत में, खलिहान में, फुटपाथ परफिर भी जो बिकते नहीं उनका विसर्जन भी संभव नहीं होताकिसी संग्राम में इस तरह आदमी के विर्सजन के खिलाफवे एक अंतहीन जुलूस में...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]अब नहीं होती किसी से कोई शिकायत - प्रफुल्ल कोलख्यान
पहले होती थी बहुतअब नहीं होती किसी से कोई शिकायतन रूबल से, न डॉलर सेहाँ, तुम से भी नहीं और आप से भी नहीं
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
[texts]ठीक नहीं जी, हाँ ठीक नहीं - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह माना गहन अँधेरा हैयह भी कि दूर सबेरा हैपर चुप्पा-चुप्पी ठीक नहींमाथे पर धर हाथ बैठनाचुप रहना और सब सहनाठीक नहीं जी, हाँ ठीक नहीं 
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]लोग बेखौफ हैं - प्रफुल्ल कोलख्यान
लोग बेखौफ हैंउन्हें एक ही शिकायत थी फिलहाल किगुब्बारों के फूटने या फोड़ दिये जाने के बारे मेंकानूनी स्थिति उतनी साफ नहीं है इस मुल्क में
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]दिखे जहाँ से, वहाँ से देखो - प्रफुल्ल कोलख्यान
दिखे जहाँ से, वहाँ से देखोदेखो, ठीक यहाँ से देखो, वहाँ से देखोदिखे जहाँ से, वहाँ से देखोतुम्हें नहीं तो किसे दिखेगा !
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]देश में जनादेश का संदेश - प्रफुल्ल कोलख्यान
गुजरात के जनादेश का एक पाठ राजनीतिक है, तो दूसरा पाठ सांस्कृतिक और सामाजिक भी है। राजनीतिक दल अपने हित साधन के लिए इसका राजनीतिक पाठ तैयार कर रहे हैं। हमारी चिंता इस जनादेश के सांस्कृतिक और सा...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गुजरात; जनादेश; kolkhyan; hindj; gujrat
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[texts]भारत भकोसवा ऐ रामा - प्रफुल्ल कोलख्यान
भारत भकोसवा ऐ रामाचैत महीनवाँ ऐ रामालह, लह लहकावै, लहर-लहरिया उठावैझर, झर, झहरावै लहरिया झरकौआ
Keywords: कोलख्यान; भारत; भकोसवा; कविता.हिंदी; kokhyan; hidi; bharat
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[texts]श्रद्धा से तिकड़म का नाताः पियो संत हुगली का पानी - प्रफुल्ल कोलख्यान
क्या हिंदी समाज  श्रद्धा से तिकड़म का नाता तोड़ने का प्रयास कर पायेगा? सवाल यह भी है कि इस प्रयास में हिंदी साहित्य के युवा हस्तक्षेप की प्यासी पथरायी आँखें चौराहे के उस नुक्कड़ पर अपनी क्या भ...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; समाज; kolkhyan; hindi
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[texts]फगुनवाँ में - प्रफुल्ल कोलख्यान
फगुनवाँ में, पोरे-पोर गुलाल लागेबुढ़िया के अजगुत श्रृँगार लागे होफगुनवाँ में, सब के गाते बयार लागे
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; गीत; Kolkhyan; hindi; geet; फागुन
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[texts]Prafulla Kolkhyan TERAH KATHWA - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक कहानीः तेरह कट्ठवा एक तरफ बाढ़ का पानी और दूसरी तरफ कुमिया की अधखुली आँख की कोर से ढरकते आँसू। उस आँसू की भाखा कौन पढ़े। जो पढ़े सो ज्ञानी होए। जनम कृतार्थ हो जाये। दोनो तरफ पानी-ही-पानी। पा...
Keywords: कहानी; कोलख्यान; hindi; kahani
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[texts]अभी समर शेष है - प्रफुल्ल कोलख्यान
सभ्यता और संस्कृति में स्वाभाविक गतिशीलता होती है। इस गतिशीलता को प्रगतिशीलता में बदलने की कोशिश भी जारी रहती है। इस गतिशीलता और प्रगतिशीलता से उत्पन्न बदलाव में स्वाभाविक क्रमिकता होती ह...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; साहित्य; आलोचना; लेख; kolkhyan; hindi; lekh
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
एक अच्छी कविता के बारे मेंसोचते हुएमैं आपके बारे मेंसोचने लगता हूँआपके बारे मेंसोचते हुए मैंएक अच्छी कविता के बारे मेंसोचने लगता हूँ
Keywords: कोलख्यान; कविता; kolkhyan; hindi
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[texts]बच्चा उदास है - प्रफुल्ल कोलख्यान
होशियार बच्चेतमीज दे रहे हैं किअपराध हैजाना इस खेल के खिलाफ
Keywords: कोलख्यान; कविता.हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]नंदनकानन के बाघ - प्रफुल्ल कोलख्यान
नंदनकानन के बाघस्थिति की नजाकत को भाँपते हुए बाघ महाराज ने कहाअसल मुसीबत की जड़ यह लोकतंत्र हैबाघ इसी लोकतंत्र से मरते हैं।
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]खुद को जीना सिखलाया - प्रफुल्ल कोलख्यान
मैं ने अपने जख्मों कोअपने दुख पर हँसना सिखलाया
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]यह आप ही की लीला है  - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह आप ही की लीला है प्रभु, आप ही जानते हैं!हम क्या कहें... क्या कहें हम कि लोकतंत्र है और हमें भी कुछ कहना है, कि यह आप ही की लीला है या यह कहें कि प्रभु कि जो कहना है सो कह दिया! 
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; लीला; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]मौसम, बहुत खराब है, - प्रफुल्ल कोलख्यान
मौसम, बहुत खराब है, तुम न आये, न सही, तुम्हारा ख्याल तो है।पाँव फैलाने के लिए चादर न सही, मुँह ढकने के लिए रुमाल तो है!
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]सपना और साहस - प्रफुल्ल कोलख्यान
सपना और साहससभ्यता के कायदे से जूता पहनकरसपनों में टहलना गुनाह है
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]सड़क का जायजा - प्रफुल्ल कोलख्यान
भूखे पेट सोकरसपनों का मजा लेने से बेहतरदीवार में सूराख करसड़क का जायजा लेना है।
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]समकालीन चुनौतियों के सामने हिंदी कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
समकालीन कविता के बारे में दो विपरीत राय सामने आती है। कुछ लोग समकालीन कविता के परिदृश्य को बहुत ही हताशाजनक बताते हैं तो कुछ लोग इसे बहुत ही उत्साहवर्द्धक और गर्व करने लायक भी बताते हैं। प्रक...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]हम आजाद हैं - प्रफुल्ल कोलख्यान
मिट्टी का होनाअंजुरी में एहसास हैधरती की उष्मा का
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]डर, जो बाहर भी है और भीतर भी - प्रफुल्ल कोलख्यान
डर एक संदेश भी है इन दिनों। डर का संदेश हो जाना इसलिए भी त्रासद है कि एक समय चित्त की भय-शून्यता की कामना विश्व कवि रवींद्रनाथ के ठाकुर के काव्य में उतरकर कोलकाता ही नहीं, बंगाल ही नहीं, भारत ही न...
Keywords: kolkhyan; hindi; कोलख्यान; निशांत; आलोचना
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[texts]ढूढू पनाह क्या मतलब - प्रफुल्ल कोलख्यान
जब तू ही मेरा दोस्त नहीं रहा जालिम तो।अब किसी और से रस्मो-राह, क्या मतलब।।
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]कातिल से जिरह करेगा, रे पागल मकतूल - प्रफुल्ल कोलख्यान
हाँ, बहुत महीनी छाँट लिये, बेटा तुम परफूल।मोटी-मोटी बात करो अब, मत दुहराओ भूल।यहाँ लाख टका डोनेशन पर, मिलता है स्कूल।सच नेशन से बड़ा डोनेशन अब है यही उसूल।सच कमीशन सच है, मिशन है अब उलजुलूल।
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]कातिल से जिरह करेगा, रे पागल मकतूल - प्रफुल्ल कोलख्यान
कातिल से जिरह करेगा, रेपागल मकतूल
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]आँख बोलती है - प्रफुल्ल कोलख्यान
मैं देखता हूँ और सोचता हूँमैं सोचता हूँ और देखता हूँमैं चाँद से लिए गयेधरती के चित्र देखता हूँ
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]ढूढ़ू पनाह क्या मतलब - प्रफुल्ल कोलख्यान
जब तू ही मेरा दोस्त नहीं रहा जालिम तो।अब किसी और से रस्मो-राह, क्या मतलब।।
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kolkhyan; kavita; hindi
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[texts]जीवन का आख्यान - प्रफुल्ल कोलख्यान
साहित्य पढ़ने से दो तरह के लाभ पर तुरंत ध्यान जाता है। पहला लाभ तो यह कि जिन्हें हम पहले से जानते हैं, उन्हें भी नये तरह से जानने का अवसर मिलता है और दूसरा यह कि जिन्हें हम नहीं जानते हैं, उन से भी ...
Keywords: कोलख्यान; भगवादास; बाबल; उपन्यास; kolkyan; hindi
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[texts]ल किधर से लायेंगे - प्रफुल्ल कोलख्यान
ये स्वजन हैं मान जायेंगेजब दिल से क्षमा के गीत गाये जायेंगेमुश्किल मगर यह कि अब दिल किधर से लायेंगे!
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]सौ में सौ का काँटा लगा रहे - प्रफुल्ल कोलख्यान
सौ में सौ का काँटा ,लगा रहे नये महिपालजैसे भी हो, ओखली में सिर जब दिया डालहाँ, पड़ी नहीं बस दिखी है, मूसल की छायाऔर इत्ते ही पर, अब ही से, हो गया बेहाल!!
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]फिर भी अफवाह है - प्रफुल्ल कोलख्यान
फिर भी अफवाह है किकुछ सफल लोगों के पास दुम है!
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कविता - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिता की लपट मद्धम न पड़ जाये और उजाला किये जाने का भरम बना रहे इसका ख्यालकर तेजी से सुलगाये जा रहे हैं जंगल
Keywords: कोलख्यान; kolkhyan
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[texts]असंतोष और आलोचना के बीच आम चुनाव - प्रफुल्ल कोलख्यान
राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने के इस संक्रमणकाल में राष्ट्रीय संरचना में अंदर-ही-अंदर बदलाव हो रहा है। यह माना जाना चाहिए कि राष्ट्र के सिकुड़ने और बाजार के फैलने से भारतीय गणराज्य की ...
Keywords: kolkhyan; कोलख्यान; हिंदी; Hindi
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[texts]बाघ और बानर के अश्लील विकल्पों के बीच - प्रफुल्ल कोलख्यान
सभ्यता और संस्कृति फटी कमीज की तरहअंतत: एक दिन खूँटी से भी गायब हो जाती हैजिसका कुर्त्ता जितना झक्क होता हैमुँह चुराती नैतिकता के संविधान में छिपे रहने परउसे उतना ही शक होता है
Keywords: कोलख्यान; कविता; हिंदी; kokhyan; kavita; hindi
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[texts]आलोचना की संस्कृति - प्रफुल्ल कोलख्यान
जीवन-विवेक न उभय-निष्क्रियता की बात करता है और न निष्पक्षता की। ऐसा इसलिए कि विषम समाज अपनी निर्मिति में ही पक्षपातपूर्ण होता है। पक्षपातपूर्ण वातावरण में, निष्पक्षता चालू पक्षपातपूर्ण व्य...
Keywords: कोलख्यान; संस्कृति; आलोचना; kolkhyan; hindi
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[texts]साहित्य, समाज और जनतन्त्र - प्रफुल्ल कोलख्यान
यह सहज ही परिलक्षित हो जाता है कि विरोध या अंधविरोध की प्रवृत्ति से परंपरा  की जीवित और जीवनदायनी शक्ति की क्षयशीलता में उतनी वृद्धि नहीं होती है जितनी कि नासमझ परंपरा-प्रेम या-अंधप्रेम के आग...
Keywords: कोलख्यान; साहित्य; समाज; जनतन्त्र; kolkhyan
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[texts]प्रफुल्ल कोलख्यान की कुछ कविताएँ - प्रफुल्ल कोलख्यान
इसके पहले कि अखबार में कोई नया लीड आयेमैं जल्दी-से-जल्दीकिलकते हुएबच्चों को चूम लेना चाहता हूँ।
Keywords: कोलख्यान; कविताएँ; kolkhyan; hindi
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[texts]आवाज को खामोशी में बदलने और - प्रफुल्ल कोलख्यान
मैं खामोश हूँजब भी तुम्हारा मुँह खुलेगामेरी खामोशी तुम्हारी जुबान पर चढ़कर बोलेगी
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; कविता; kolkhyan; hindi; kavita
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[texts]चिढ़ का चौताल - प्रफुल्ल कोलख्यान
चिढ़ना व्यक्तिगत भी होता है और सामाजिक, सामुदायिक, दलीय भी। सुना है, मिथिलांचल के एक गांव के निवासी ‘चटनी-पापड़’ कहने से बुरी तरह चिढ़ते हैं। एक सज्जन बड़े लजालू ढंग से बता रहे थे कि उनके मुहल्...
Keywords: कोलख्यान; हिंदी; kolkhyan
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